उत्तर : जीवन का कभी अंत नहीं होता है। कुछ सपनों के टूट जाने या असफल हो जाने से संपूर्ण जीवन समाप्त नहीं होता।
प्रश्न - ख) यहाँ कुछ भी खोता कैसे नहीं है?
उत्तर: इस संसार में पनघट पर गगरियाँ फूटने पर भी और तट पर कश्तियाँ डूबने पर भी जीवन की चहल-पहल और निरंतरता कभी समाप्त नहीं होती, इसलिए यहाँ कुछ भी हमेशा के लिए नष्ट या नहीं खोता है।
प्रश्न - ग) किसके लाख कोशिश करने पर भी उपवन नहीं मरता है?
उत्तर : के लाख कोशिश करने पर भी उपवन (बाग़) नहीं मरा करता है। कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियाँ आएं, प्रकृति और जीवन का सौंदर्य फिर से खिल उठता है।
बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर 2. सही उत्तर पर का [ ✓ ] चिह्न लगाइए-
उत्तर : क) छिप-छिपकर कौन आँसू बहाता है?
✅ (ii) कायरउत्तर : ख) सपने की प्रकृति कैसी होती है?
✅ (iii) क्षणभंगुरउत्तर : ग) प्रकृति का क्या नियम है?
✅ (i) रात के बाद सुबह होती है।उत्तर : घ) लौ की आयु घटाने वाले कौन हैं?
✅ (ii) जीवन में आशा और उत्साह का नाश करने वालेउत्तर : ङ) ‘तूफ़ान’ किसका प्रतीक होते हैं?
✅ (ii) अकस्मात उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों के
दिए गए शब्दों का उनके सही प्रतीकों के साथ मिलान इस प्रकार है:
उत्तर : • क) मोती — (ix) आँसू
• ख) पानी — (v) घोर परिश्रम (या जीवन का प्रवाह)
• ग) सावन — (vi) खुशियाँ
• घ) दीप — (viii) आशा
• ङ) आँगन — (vii) मानवीय जीवन / परिवार
• च) जिल्द — (i) शरीर (वस्त्र या आवरण)
• छ) पोथी — (iv) आत्मा (या जीवन-पुस्तक)
• ज) खिलौने — (iii) सुख-सुविधा के साधन / बचपन की वस्तुएँ
• झ) गगरियाँ — (ii) जीवन (सांसारिक रूप)
4. संक्षिप्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न - क) सपने के विषय में कवि क्या कहता है?
उत्तर : कवि कहता है कि सपने क्षणभंगुर होते हैं। वे आते-जाते रहते हैं, इसलिए सपनों के टूट जाने पर निराश नहीं होना चाहिए। मनुष्य को नए सपने देखकर उन्हें पूरा करने का प्रयास करते रहना चाहिए।
प्रश्न - ख) बिना प्रयास किए हाथ पर हाथ रखने वालों को कवि क्या समझाना चाहता है?
उत्तर : कवि ऐसे लोगों को समझाना चाहता है कि केवल भाग्य के भरोसे बैठने से सफलता नहीं मिलती। जीवन में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत, साहस और प्रयास करना आवश्यक है।
प्रश्न - ग) प्रियजन से बिछुड़ने पर निराश क्यों नहीं होना चाहिए?
उत्तर : प्रियजन से बिछुड़ना जीवन का एक दुखद अनुभव है, लेकिन इससे जीवन समाप्त नहीं हो जाता। जीवन निरंतर आगे बढ़ता रहता है। इसलिए मनुष्य को दुख में डूबने के बजाय आशावादी बने रहना चाहिए और जीवन को नए उत्साह के साथ जीना चाहिए।
5. विस्तृत प्रश्नोत्तर
प्रश्न - क) द्वेष, ईर्ष्या आदि भावों से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर : द्वेष और ईर्ष्या मनुष्य के मन को अशांत करते हैं तथा जीवन की खुशियाँ छीन लेते हैं। इन भावों से बचने के लिए हमें दूसरों की सफलता से प्रसन्न होना चाहिए और अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। हमें प्रेम, सहयोग, सहानुभूति और सकारात्मक सोच को अपनाना चाहिए। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। क्षमा, संतोष और आत्मविश्वास की भावना विकसित करके भी द्वेष और ईर्ष्या से बचा जा सकता है।
प्रश्न - ख) जीवन को जीवंत रखने के लिए मनुष्य को क्या करना चाहिए?
उत्तर : जीवन को जीवंत रखने के लिए मनुष्य को हमेशा आशावादी और उत्साही रहना चाहिए। कठिनाइयों और असफलताओं से घबराकर हार नहीं माननी चाहिए। उसे निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए और नए सपने देखने चाहिए। प्रियजनों से बिछुड़ने, दुख आने या परिस्थितियाँ विपरीत होने पर भी जीवन के प्रति विश्वास बनाए रखना चाहिए। प्रेम, सहयोग, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहने से जीवन में उत्साह और जीवंतता बनी रहती है।उत्तर : ग) भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए
प्रश्न - (i) “रूठे दिवस मनानेवालो ! फटी कमीज़ सिलानेवालो ! कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।”
उत्तर : (i) “रूठे दिवस मनानेवालो ! फटी कमीज़ सिलानेवालो ! कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।”
(i) भाव-सौंदर्य:
इन पंक्तियों में कवि मनुष्य को निराशा से बाहर निकलकर आशावादी बनने की प्रेरणा देता है। जीवन में कुछ खुशियाँ समाप्त हो जाएँ या कुछ प्रियजन साथ न रहें, तो भी जीवन रुकता नहीं है। जैसे कुछ दीपक बुझ जाने से पूरा आँगन अंधकारमय होकर समाप्त नहीं हो जाता, वैसे ही जीवन में कुछ दुख आने से जीवन की आशा समाप्त नहीं होती। इन पंक्तियों में आशावाद, जीवन के प्रति विश्वास और संघर्ष की प्रेरणा का सुंदर भाव व्यक्त हुआ है।
प्रश्न - “कुछ मुखड़ों की नाराजी से दर्पण नहीं मरा करता है।”
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उत्तर : (ii) “कुछ मुखड़ों की नाराजी से दर्पण नहीं मरा करता है।”
(ii) भाव-सौंदर्य:
इन पंक्तियों में कवि कहता है कि कुछ लोगों की नाराज़गी या असहमति से जीवन का महत्व समाप्त नहीं हो जाता। दर्पण सभी चेहरों को प्रतिबिंबित करता है; कुछ लोग उससे नाराज़ हों, तब भी उसका अस्तित्व बना रहता है। इसी प्रकार मनुष्य को भी दूसरों की नाराज़गी से निराश नहीं होना चाहिए। उसे अपने आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए। इन पंक्तियों में आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का भाव सुंदर रूप से व्यक्त हुआ है।