प्रश्न - क) 'ऐसा कभी नहीं हुआ था...' क्या कभी नहीं हुआ था?
उत्तर : धर्मराज के लाखों वर्षों के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था कि किसी आदमी की मृत्यु के पाँच दिन बीत जाने के बाद भी उसका जीव अपनी देह त्यागकर यमलोक न पहुँचे। भोलाराम का जीव यमदूत को चकमा देकर रास्ते से ही गायब हो गया था, जो कि पहली बार हुआ था।
प्रश्न - ख) धर्मराज के अनुसार नर्क में कौन-कौन थे?
उत्तर : धर्मराज के अनुसार नर्क में बड़े-बड़े इंजीनियर, ठेकेदार और ओवरसियर शामिल थे, जिन्होंने नर्क में इमारतें बनाकर रहने का काम किया था या बेईमानी से भ्रष्टाचार किया था।
प्रश्न - ग) 'भोलाराम ने दरख्वास्त तो भेजी थीं, पर उन पर वजन नहीं रखा था।' - यहाँ 'वजन' का क्या आशय है?
उत्तर : यहाँ 'वजन' का आशय रिश्वत (घूस) या पैसे से है। भोलाराम ने पेंशन के कागजात (दरख्वास्त) तो भेजे थे, लेकिन उन पर घूस के रूप में कोई भारी वस्तु या धन नहीं रखा, जिसके कारण उसका काम रुका रहा और दरख्वास्त दफ्तर में ही कहीं उड़ गई।
प्रश्न - क) स्वर्ग या नरक में निवास अमीर व गरीब के आधार पर मिलता था। — [ x ] (गलत, निवास कर्म और सिफारिश के आधार पर मिलता था)
2. सही कथन के आगे का चिह्न और गलत कथन के आगे x का चिह्न लगाइए -
उत्तर : क) स्वर्ग या नरक में निवास अमीर व गरीब के आधार पर मिलता था। — [ x ] (गलत, निवास कर्म और सिफारिश के आधार पर मिलता था)उत्तर : ख) यमदूत भोलानाथ को रथ पर लेकर आ रहा था। — [ x ] (गलत, यमदूत जीव को तीव्र वायु-तरंग पर लेकर आ रहा था)उत्तर : ग) ओवरसियरों ने ठेकेदारों को घूस दी। — [ x ] (गलत)उत्तर : घ) भोलाराम चित्रकूट रहता था। — [ x ] (गलत, भोलाराम जबलपुर शहर में रहता था)उत्तर : ङ) भोलाराम का जीव पेंशन की दरख्वास्त में अटका था। — [ ✓ ] (सही)
किसने ? किससे?
प्रश्न - क) मूर्ख, जीवों को लाते-लाते बूढ़ा हो गया।
उत्तर : किसने: धर्मराज से,
किससे: यमदूत से)
प्रश्न - ख) "इनकम होती तो टैक्स होता। भुखमरा था।
उत्तर : किसने: चित्रगुप्त, किससे: नारद मुनि से)
प्रश्न - मुझे भिक्षा नहीं चाहिए, मुझे भोलाराम के बारे में पूछताछ करनी है।
उत्तर : "किसने: नारद मुनि , किससे: भोलाराम की बेटी से
प्रश्न - घ) "पेंशन का केस बीसों दफ्तरों में जाता है।"
उत्तर : किसने: दफ्तर का साहब , किससे: नारद मुनि से)
प्रश्न - ङ) "चलो, स्वर्ग में तुम्हारा इंतजार हो रहा है।"
उत्तर : किसने: नारद मुनि, भोलाराम के जीव से
-4. संक्षिप्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न - क) भोलाराम के जीव को ढूँढ़ते हुए यमदूत की दशा कैसी हो गई थी?
उत्तर : भोलाराम के जीव को ढूँढ़ते-ढूँढ़ते यमदूत बहुत परेशान हो गया था। वह थककर बेहाल हो गया था। उसे भोलाराम का जीव कहीं नहीं मिला और वह खाली हाथ यमलोक लौट गया।
प्रश्न - ख) भोलाराम की पत्नी ने अपनी समस्या के बारे में नारद जी से क्या-क्या कहा?
उत्तर : भोलाराम की पत्नी ने नारद जी को बताया कि उसके पति की मृत्यु को कई दिन हो चुके हैं, लेकिन उनकी पेंशन अभी तक नहीं मिली है। घर में खाने-पीने तक की समस्या है। पाँच बच्चों और परिवार का पालन-पोषण करना कठिन हो गया है। उसने नारद जी से पेंशन दिलवाने में सहायता करने की प्रार्थना की।
प्रश्न - ग) चित्रगुप्त ने पृथ्वी की स्थिति के विषय में धर्मराज को क्या बताया ?
उत्तर : चित्रगुप्त ने धर्मराज को बताया कि पृथ्वी पर भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है। सरकारी दफ्तरों में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता। लोग अपने स्वार्थ के लिए नियमों की अनदेखी करते हैं और हर काम में लेन-देन तथा रिश्वत का बोलबाला है।
5. विस्तृत प्रश्नोत्तर -
प्रश्न - क) नारद सरकारी दफ़्तर में क्यों गए? उन्होंने वहाँ क्या-क्या देखा ?
उत्तर : नारद जी भोलाराम की पत्नी की सहायता करने के लिए सरकारी दफ्तर गए थे। भोलाराम की पेंशन काफी समय से रुकी हुई थी और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। नारद जी उसकी पेंशन का पता लगाने तथा उसे दिलवाने के उद्देश्य से दफ्तर पहुँचे। सरकारी दफ्तर में उन्होंने देखा कि कर्मचारी अपने काम के प्रति लापरवाह थे। फाइलें इधर-उधर पड़ी थीं और कोई भी कर्मचारी बिना स्वार्थ के काम करने को तैयार नहीं था। कर्मचारियों में रिश्वत लेने की प्रवृत्ति दिखाई देती थी। नारद जी ने यह भी देखा कि भोलाराम की पेंशन की फाइल कई महीनों से एक बाबू की मेज पर पड़ी हुई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इससे सरकारी व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार और लालफीताशाही का पता चलता है।
प्रश्न - ख) भोलाराम का जीव कहाँ अटका था? वह कैसे मिला?
उत्तर : भोलाराम का जीव सरकारी दफ्तर में उसकी पेंशन की फाइल में अटका हुआ था। जब नारद जी भोलाराम की पेंशन के संबंध में दफ्तर पहुँचे और उसकी फाइल निकलवाई, तो उन्होंने भोलाराम के जीव को फाइल के भीतर से आवाज देते हुए सुना।
नारद जी ने जब भोलाराम को पुकारा तो फाइल के अंदर से आवाज आई—“मैं भोलाराम हूँ।” इस प्रकार पता चला कि भोलाराम का जीव सरकारी दफ्तर की पेंशन वाली फाइल में अटका हुआ था। यह घटना लेखक ने सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर व्यंग्य करने के लिए प्रस्तुत की है।
प्रश्न - ग) आशय स्पष्ट कीजिए- “भोलाराम ने दरख्वास्त तो भेजी थीं, पर उन पर वज़न नहीं रखा था, इसलिए कहीं उड़ गई होंगी।”
उत्तर : इस कथन का आशय है कि भोलाराम ने अपनी पेंशन के लिए कई बार आवेदन दिए थे, लेकिन सरकारी दफ्तर में बिना ‘वज़न’ अर्थात रिश्वत के किसी आवेदन पर ध्यान नहीं दिया जाता था। इसलिए उसकी दरख्वास्तें आगे नहीं बढ़ीं और फाइलों में दबकर रह गईं। लेखक ने इस कथन के माध्यम से सरकारी दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और लापरवाही पर व्यंग्य किया है।